भगवान श्रीराम और आप

भगवान श्रीराम और आप

वर्तमान समय में भारत के कई समाज, जातियां और राजघराने स्वयं को भगवान श्री राम, उनके पुत्रों और उनके भाइयों के वंशज के रूप में चिन्हित करते हैं। मुख्य रूप से श्री राम के पुत्रों (लव और कुश) तथा उनके परिवार से जुड़ी आधुनिक जातियों और समुदायों की जानकारी इस प्रकार है:

​1. कुश के वंशज

​कुशवाहा (कछवाहा) राजपूत: माना जाता है कि कुश के वंश से ही कुशवाहा या कछवाहा राजपूतों का वंश चला है। राजस्थान का जयपुर राजघराना स्वयं को भगवान राम के बड़े पुत्र कुश का वंशज (कछवाहा वंश) मानता है।

​मौर्य, सैनी और शाक्य: कुछ ऐतिहासिक और सामाजिक मान्यताओं के अनुसार मौर्य, सैनी और शाक्य संप्रदाय की उत्पत्ति भी कुश के वंश से ही मानी जाती है।

​बेदी खत्री (सिख समाज): सिख धर्म के 'बचित्तर नाटक' और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, 'बेदी' खत्री समाज कुश का वंशज है। इसी वंश में सिखों के प्रथम गुरु, श्री गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था।

​अग्रवाल समाज: कुछ दावों और 'अग्र भागवत' के हवाले से यह माना जाता है कि अग्रवाल समाज के पूर्वज महाराजा अग्रसेन का जन्म कुश की 34वीं पीढ़ी में हुआ था, जिसके आधार पर अग्रवाल समाज भी स्वयं को श्री राम का वंशज मानता है।

​2. लव के वंशज

​राघव राजपूत: राजा लव से राघव राजपूतों की उत्पत्ति मानी जाती है, जिनकी शाखाओं में बड़गूजर, सिकरवार और जयास वंश शामिल हैं।

​सिसोदिया राजपूत (मेवाड़ राजघराना): राजस्थान का प्रतिष्ठित मेवाड़ राजपरिवार और सिसोदिया राजपूत (तथा गहलोत/गुहिल) स्वयं को लव का वंशज मानते हैं।

​सोढी खत्री (सिख समाज): सिख परंपरा के अनुसार, 'सोढी' खत्री समाज लव के वंशज हैं। सिखों के चौथे गुरु से लेकर दसवें गुरु (श्री गुरु गोबिंद सिंह जी) इसी सोढी वंश में अवतरित हुए थे।

​3. पाटीदार (पटेल) समाज

गुजरात का पाटीदार समाज भी स्वयं को भगवान राम की वंशावली से जोड़ता है। इस समाज के 'लेउवा' पाटीदार स्वयं को लव का वंशज और 'कड़वा' पाटीदार स्वयं को कुश का वंशज मानते हैं।

​4. लक्ष्मण जी के वंशज

पश्चिमी भारत के गुर्जर-प्रतिहार (परिहार राजपूत) स्वयं को भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण का वंशज मानते हैं। चूँकि लक्ष्मण जी ने श्री राम के 'प्रतिहार' (द्वारपाल या रक्षक) की भूमिका निभाई थी, इसलिए इस वंश का नाम प्रतिहार पड़ा।

​5. अन्य समुदाय

हिंदू समुदायों के अलावा, हरियाणा के मेवात क्षेत्र के कुछ मुस्लिम समुदाय (जैसे दहंगल गोत्र के मेव मुस्लिम) भी ऐतिहासिक रूप से स्वयं को रघुवंशी और श्री राम का वंशज होने का दावा करते हैं।